अवतार व देवता कैसे बने
वस्तुतः वैष्णव धर्म के अवतारवाद में विष्णु को मुख्य संरक्षक और ईश्वर माना गया है और उसी के अनुरूप गुप्त शासकों ने दैवीय उत्पत्ति के सिद्धान्त को मान्यता देते हुए स्वयं को परमभागवत की उपाधि से विभूषित किया गया तथा विष्णु के दस अवतारों जैसे-मत्स्य,कूर्म,वराह,नृसिंह,बामन, परसुराम,राम,कृष्ण,बुद्ध और कल्कि को स्वीकृत और स्थापित किया गया। वास्तव में,इन प्रमुख अवतारों को सामान्य कल्पना न मानकर साम्राज्य विस्तार के पश्चात एक केंद्रीयकृत व्यवस्था का आधारभूत व् मजबूत अंग माना जा सकता है क्योंकि गुप्तों के साम्राज्य विस्तार के पश्चात स्थानीय शासकों एवं प्रजा/जनता के द्वारा विद्रोह किये जाने की आशंका सदैव बलवती रही है इसीलिए क्षेत्रीय बाहुल्यता के आधार पर इन दैवीय प्रतीकों को विष्णु का अवतार बनाकर यही विचार प्रकट किया गया कि जिस प्रकार वे विष्णु के अवतार हैं उसी प्रकार परमभागवत गुप्तशासक के अधीन आप हैं और परमभागवत का विरोध मूलतः ईश्वर विष्णु का विरोध है,चूंकि इस काल तक वैष्णव धर्म का व्यापक प्रस...