लीला
sex तुलसी कृष्ण की गोपी थी। कृष्ण ने भोग किया तभी राधा आ गई और तुलसी को श्राप दिया धरती पर जन्म लेने को। ( अभी कृष्ण और राधा पृथ्वी पर नहीं गोलोक में हैं। ) कृष्ण ने कहा कि तुम्हे पृथ्वी पर विष्णु भगवान की पत्नी बनना होगा।
कृष्ण का एक मुख्य सेवक दामा भी उसी तुलसी गोपी को भोगना चाहता है पर राधा से डरता है, कुछ नहीं कर सका। राधा के श्राप से ही धरती पर दामा ने दैत्य शंखचूड के नाम से जन्म लिया। उसने तप किया तुलसी को पाने के लिए और तुलसी ने तप किया विष्णु को पाने के लिए। ब्रह्म ने तुलसी को कहा कि पहले तुम्हे शंखचूड की पत्नी बनना होगा तब विष्णु मिलेंगे।
उपरोक्त सब मेरी पिछली पोस्ट में आ चुका है।
तुलसी है तो राजा की लड़की पर रहती जंगल में हैं। पुराण की कहानियों में जब ब्रह्मा जी समेत किसी को sex चढ़ जाएं तो यह उसका कसूर नहीं होता था। कामदेव ने आक्रमण किया तब ऐसा हुआ। तो जंगल में तुलसी पर कामदेव ने हमला किया तो तुलसी बेचैन हो गई। कपड़े उतार कर नंगी हो जाती है। सो जाती है। चहल कदमी करने लगती है। फल भी कभी जहर जैसे लगते हैं।
स्वप्न में शंखचूड उसके बिस्तर पर उसके साथ लेट कर उसके साथ रतिप्रसंगपूर्ण ( मैथुन करने वाली ) बातें करता है। बार बार चूमता है, आलिंगन करता है।
फिर तुलसी की चेतना वापिस आ जाती है। अब बेचारी आई तो जंगल में तप करने और अगर कामदेव अपने बाणों से घायल कर दे, काम संतप्त कर दे उस बेचारी का क्या दोष।
अगर हमलोग कुछ ऐसा करें तो जरूर कसूर हमारा ही होगा। कामदेव हमे थोड़ी घायल करने आता है।
फिर वास्तव में शंखचूड आ ही जाता है। शंखचूड ने तपस्या से एक सुरक्षा कवच भी हासिल किया हुआ है।
फिर शंखचूड और तुलसी का संवाद है। तुलसी ने बताया कि संस्कारी पुरुष को अकेली स्त्री से बात नहीं करनी चाहिए और स्त्रियों के सभी अवगुण गिनवा दिए। पर ब्रह्मा जी ने तो दोनों की शादी करवानी ही है। तो वही जंगल में ही शादी हुई। शंखचूड ने यह भी बताया कि "मैं गोलोक में भी तुम्हारे साथ सम्भोगार्थ उत्कंठित था।"
ये कहानी है चौखंबा कृष्णदास अकादमी वाराणसी की ब्रह्मवैवर्त पुराणम प्रथम भाग प्रकृतिखंडम अध्याय 16 की।
इसके बाद पुराण में दोनों की जंगल में ही काम लीला का वर्णन है। फिर वे दोनों घर आ गए। वहां :–
"वहां उसने कामक्रीड़ार्थ एक रम्य रतिगृह निर्माण कराया"
(There he constructed a beautiful
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संभवत: कृष्ण का बचपन नंदगांव और गोकुल में गोपियों के बीच बीता. कृष्ण औरतो के मामले में शुरू से ही स्वतंत्र विचार के थे. पुराणों के अनुसार उनका मिजाज़ लड़कपन से ही आशिकाना मालूम होता हैं.
' ता: वार्यमाणा: पतिभि: पितृभि्भ्रातृभिस्तथा, कृष्ण गोपांगना रात्रौं रमयंती रतिप्रिया :' -विष्णुपुराण, 5, 13/59.
अर्थात वे रतिप्रिय गोपियाँ अपने पतियों, पिताओं और भाइयो के रोकने पर भि रात में कृष्ण के साथ रमण करती थी . कृष्ण और गोपियों का अनुचित सम्बन्ध था यह बात भागवत में स्पष्ट रूप से मोजूद हैं, ईश्वर अथवा उस के अवतार माने जाने वाले कृष्ण का जन सामान्य के समक्ष अपने ही गाँव की बहु बेटियों के साथ सम्बन्ध रखना क्या आदर्श था ? कृष्ण ने गोपियों के साथ साथ ठंडी बालू वाले नदी पुलिन पर प्रवेश कर के रमण किया. वह स्थान कुमुद की चंचल और सुगन्धित वायु आनंददायक बन रहा था. बाहे फैलाना, आलिंगन करना, गोपियों के हाथ दबाना, बाल (चोटी) खींचना, जंघाओं पर हाथ फेरना, नीवी एवं स्तनों को चुन, गोपियों के नर्म अंगो नाखुनो से नोचना, तिर्चि निगाह से देखना, हंसीमजाक करना आदि क्रियाओं से गोपियों में कामवासना बढ़ाते हुए कृष्ण ने रमण किया. -
श्रीमदभागवत महापुराण 10/29/45 कृष्ण ने रात रात भर जाग कर अपने साथियो सहित अपने से अधिक अवस्था वाली और माता जैसे दिखने वाली गोपियों को भोगा. - आनंद रामायण, राज्य सर्ग 3/47 कृष्ण के विषय में जो कुछ आगे पुरानो में लिखा हैं उसे लिखते हुए भी शर्म महसूस होती हैं की गोपियों के साथ उसने क्या-क्या किया इसलिए में निचे अब सिर्फ हवाले लिख रहा हूँ जहा कृष्ण ने गोपियों के यौन क्रियाये की हैं - -
ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, अध्याय 28-6/18, 74, 75, 77, 85, 86, 105, 109,110, 134, 70. - ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4, 115/86-88 कृष्ण का सम्बन्ध अनेक नारियों से रहा हैं कृष्ण की विवाहिता पत्नियों की संख्या सोलह हज़ार एक सो आठ बताई जाती हैं.
धार्मिक क्षेत्र में कृष्ण के साथ राधा का नाम ही अधिक प्रचलित हैं. कृष्ण की मूर्ति के साथ प्राय: सभी मंदिरों में राधा की मूर्ति हैं. लेकिन आखिर ये राधा थी कौन? ब्रह्मावैवर्त पुराण राधा कृष्ण की मामी बताई गयी हैं. इसी पुराण में राधा की उत्पत्ति कृष्ण के बाए अंग से बताई गयी हैं 'कृष्ण के बायें भाग से एक कन्या उत्पन्न हुई. गुडवानो ने उस
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