सती

राम की माता कौशल्या तो राजा दशरथ का कत्ल करवाना चाहती थी। लक्ष्मण ने यह प्रस्ताव पेश किया था और कौशल्या माता ने भगवान राम को इस प्रस्ताव पर विचार करने को कहा था। ( गीता प्रेस गोरखपुर की अयोध्या कांड सर्ग 21 श्लोक 12, 19, 21 ). कैकई सती क्यों नहीं हुई, यह तो सब को पता ही होगा। वैसे भी ब्राह्मणों का बनाया हुआ सिद्धांत है कि ब्राह्मणों की पत्नियां सती नहीं होंगी तो फिर राजा की रानियां क्यों सती होंगी ? (चौखंबा सुरभारती प्रकाशन की पदम पुराण सृष्टि खंड अध्याय 52 - है तो गीता प्रेस वाली पदम पुराण में भी पर उसके पन्ने नहीं लगा रहा इसलिए उसकी बात नहीं कर रहा। )

खैर पांडु की मृत्यु कैसे हुई और माद्री सती हुई आज इस पर बात करते हैं।

अर्जुन का 14 वा वर्ष पूरा हुआ तो कुंती ने ब्राह्मणों के लिए कोई पूजा पाठ का आयोजन किया। पंडितों को भोजन परोसने में लगी थी पर पांडु माद्री को ले कर घूमने निकल गए। बसंत का मौसम था। सेक्स ने पांडु पर कब्जा कर लिया। माद्री से बलपूर्वक लिपट गए।

समागम किया और मौत। लगी माद्री रोने। कुंती ने आ कर माद्री को डांट लगाई। माद्री ने कहा कि sex से मेरा और महाराज की तृप्ति नहीं हुई इसलिए मैं उनके साथ सती हो कर हम दूसरे लोक में तृप्ति प्राप्त करेंगे।कुंती ने इस प्रकार आज्ञा प्रदान की :– 

"विशाललोचने ( बड़ी आंखों वाली ) ! तुम्हें आज ही स्वर्गलोक में पति का समागम प्राप्त हो !  तुम स्वर्ग में पति से मिलकर अनन्त वर्षो तक प्रसन्न रहो ।!"
( गीता प्रेस गोरखपुर की महाभारत आदि पर्व अध्याय 124)

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