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Showing posts from May, 2025

दयानंद

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दयानंद सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश के अष्टम समुल्लास में एक मंत्र का कुछ भाग लिखा है जो इस प्रकार है " मनुष्या ऋषयश्च ये। ततो मनुष्या अजायन्त " इस सत्यार्थ प्रकाश लिखा है और दयानंद सरस्वती बोल रहे कि यह यजुर्वेद में लिखा है  परन्तु मैं आर्य समाजियों के वेबसाइट खोल देखा तो 🤣 यह मंत्र आर्य समाजियों को यजुर्वेद में मिला ही नहीं है 🤣🤣🤣 दयानंद सरस्वती मंत्र तो लिखा लेकिन यह बताना कैसे भुल गया कि यजुर्वेद के किस अध्याय व मंत्र संख्या में लिखा है? नोट:-  ★ आर्य समाजी आंख बंद करके दयानंद पर कैसे भरोसा कर लिया कि सत्यार्थ प्रकाश सही है जबकि दयानंद तो बिना रेफरेंस का बात लिखा है ? ★ जब आर्य समाजियों को यह मंत्र वेद में नहीं मिला तो यह निष्कर्ष निकलता है कि दयानंद को वेद को बारे में सही जानकारी नहीं थी फिर कैसे कोई दयानंद को महर्षि कहां जा सकता है ? ★जब मंत्र वेद में नहीं मिला तो यह कैसे जान लिया कि इसका अर्थ बड़ा रोचक है ?

पेड़

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14000 किमी ऊंचा पेड़  भागवतकार को ऐसे पेड़ की जानकारी थी जो ग्यारह सौ योजन ( 14,080 कि.मी. ) ऊंचा था  चतुर्बेतेषु चूतजंबूकदंबन्यग्रोधाश्चत्वारः पादपप्रवराः पर्वतकेतव इवाधिसहस्रजनो नाहास्तावद् विटपविततयः शतयोजनपरिणाहाः . भगवत पुराण 5-16-12  अर्थात इन चारों - मंदर , मेरुमंदर , सुपार्श्व और कुमुद पर्वत - के ऊपर इन की जाओं के समान क्रमशः आम , जामुन , कदंब और बड़ के चार पेड़ हैं . इन में से स्यक ग्यारह सौ योजन ( 14,080 कि.मी. ) ऊंचा है और इतना ही इन की शाखाओं विस्तार है . इन की मोटाई सौसौ योजन ( 1,280 कि.मी. ) है . पहाड़ पर ग्यारह मायोजन ( 14,080 कि.मी. )

बुद्ध का ब्रह्मिकिरण

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प्रश्न : जब 9 वी सदी पूर्व पूरा भारत ही बुद्धमय था तो आज के हिन्दू (ब्राह्मण धर्म मानने वाले) बुद्ध के सिद्धांतो को कैसे भूल गए? इसका उत्तर गरुण पुराण के आचार कांड, अध्याय 132, से आप समझ सकते है।  9 वी से 13 वी सदी बुद्ध मार्ग के लिए सबसे क्रूशियल दौर था, फिर यह सम्यक मार्ग हासिये पर चला गया, बुद्ध मार्ग के पंचमांगिये(फिफ्थ कलमनिष्ठ ) ने इसे नए तेवर जैसे शैव, वैष्णो शाक्त मे बदला, लेकिन बुद्ध मार्ग के अनुवायियों को सीधे अंधभक्त बनाना आसान न था इसलिए सबसे पहले बुद्ध का ब्राह्मणीकरण किया गया, यानि बुद्ध की पूजा कराई गई, पूजा का लाभ बताये जाने लगा. उनके नाम पर व्रत रखवाया गया, फिर श्रृंगार के नाम पर उनकी पहचान छुपाई गई, जो विरोध कर सकते थे उनको महाविहार जो मंदिर मे कन्वर्ट हो गई, मे घुसने से मनाही कर दी गई। 10 पीढ़ी बाद तो लोग अपने दादा परदादा को भी भूल जाते है। फिर मंदिर मे बुद्ध के अलावे सब देवी देवता दिखने लगे लेकिन आज तक बुद्ध न दिखे।  स्क्र्रीनशॉट निचे है गरुण पुराण का खुद पढ़ लीजिये बुद्ध का ब्राह्मणीकरण कैसे किया गया। नोट 1: गरुण पुराण मे बुद्ध का ब्राह्मणीकरण किया गया है मे...

बैल गाय संभोग

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बृहदारण्यकोपनिषद  बृहदारण्यकोपनिषद के अनुसार   स्त्री ने सोचा के कैसे मुझको अपने शरीर से उत्पन कर पुत्री रूपमुझसे संभोग करता है, ऐसा सोच कर वो छिपने के लिए गाय बन गईऔर पिता बैल बन कर संभोग किया जिससे गाय पैदा हुई।इसी तरह कन्या अलग अलग रूप में छिपती रही और पिता उसके साथ उन्ही रूप में संभोग करता रहा और अलग अलग प्राणियों को जन्म देता रहा(बृहदारण्यक उपनिषद, अध्याय 1, ब्रह्मण 4, श्लोक4)

वैदिक ईश्वर

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वेदो  का  ईश्वर  वेदो  में क्या कहता  है  ? ये जानने  की  कोशिश  करते है  और सृष्टि  की रचना  किस  तरह  हुई  इत्यादि  जानते है  आये देखते है ,वेदो का ज्ञान विज्ञानं क्या कहते है ? की वेदो को  खुद  वैदिक  ईश्वर  ने बनाया  है ये मेरा  दावा  नहीं पोंगा पंडित का कहना है * वैदिक  ईश्वर ने  क्या पता वेदो को  कैसे दिया होगा वो चार ऋषिमुनियो को  दयानन्द  की विश्व  प्रशिद्ध  पुस्तक  चूत्यार्थ  प्रकाश  अरे फिर  सत्यार्थ  प्रकाश  वैसे  वह पुस्तक  में  सत्य  छोड़ कर  हर चीज  है और  प्रकाश  शब्द  नाम  मात्र है  और अँधेरा  ही  अँधेरा  है  बरहाल  उसमे में दयानद  लिखता  है की जिस तरह से  कोई  शिष्य  को  गुरु  की  आवशकता  होती है  ज्ञान प्राप्त  करने के लिए  उसी  प्रकार  से ज...

मोर आंसू से गरभ

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ब्रह्मपुराण मे लिखा है कि मोरनी मोर के आंसू पीकर गर्भ धारण करती है, क्योकि मोर ब्रह्मचारी होता है! अब मै महाभारत से एक ऐसी ही बात बता रहा हूँ.....   कश्यप ऋषि की तेरह पत्नियाँ थी, उन्होने ही समस्त जीव-जन्तुओं को जन्म दिया था (इस पर मैने पूर्व मे पोस्ट की थी) उनकी दो पत्नियो के नाम कद्रु और विनता थे.... कद्रु से सांप और विनता से अरुण तथा गरुण का जन्म हुआ था! कश्यप ऋषि की ये दोनो पत्नियाँ जब गर्भवती हुई तो इन्होने बच्चो को जन्म नही दिया, बल्कि कद्रु ने एक हजार और विनता ने दो अंडे दिये थे.......  उन अंडो को दासियों ने प्रसन्न होकर गर्म बर्तन मे रख दिया जिसमे से कद्रु के हजार नाग,सांप और तक्षक पैदा हुये! पर विनता के अंडे मे से बच्चे नही निकले तो उन्होने जल्दबाजी मे खुद एक अंडा फोड़ दिया, जिसमे वरुण देव थे..... वरुण को बहुत गुस्सा आया...    और बोले कि तुमने मुझे समय से पहले अंडा फोड़कर बाहर निकाला इसलिये मै तुम्हे श्राप देता हूँ सैकड़ो वर्षो तक तुम अपनी सौतन की नौकरानी रहोगी.... अब जरा विचार करो कि अगर महिलाऐं उस काल अंडे देती थी और बच्चा अंडे से निकलकर माँ...

वर्ण

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वर्ण व्यवस्था के अनुसार क्षत्रिय दूसरे नम्बर पर आता है। पहले पर ब्राम्हण वर्ण व्यवस्था के अनुसार क्रम कुछ इस प्रकार से है। (1) ब्राम्हण (2) क्षत्रिय (3)वैश्य (4)शूद्र अब ज़रा  इस कटिंग पर गौर करते हैं, ये कटिंग श्रीमत भगवत महापुराण  की है। अगर वर्ण व्यवस्था के क्रम 2 के अनुसार क्षत्रिय सवर्ण है,तो ये क्या लिखा हुआ है.........???? अगर ये सही है तो ब्राम्हण ने ऐसा क्यों लिखा है......??? अगर ये गलत है तो सबूत के साथ इस कटिंग को गलत साबित करे। ब्राम्हण ने इसमें क्षत्रियों की तुलना  कौओं और कुत्तों  से की है। क्षत्रियों को अपना दास और दरबान बता रहें। कोई ज्ञानी क्षत्रिय इसका जबाब दे सकता है........???

वेद निंदक

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* जो वेदों और अन्य धार्मिक पुस्तकों को न माने वे अनार्य , शुद्रो , मलेच्छ , मूर्ख , नास्तिक काफिर इत्यादि है । *  वेदों का इनकार करने वाला ) ।

स्त्री बच्चे पैदा करने को

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*  बच्चे पैदा करने के लिए  स्त्रियों  की रचना  हुई है  केवल  ( मनुस्मुर्ती ९ : ९६ ) *  स्त्रियो को भूमि  और  खेती  के समान माना  जाता है ! ( मनुस्मुर्ती ९ : ३३  )

चंद्रमा ने ब्रहस्पति की पत्नी का अपहरण

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चंद्रमा ने अपने गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा का अपहरण किया। भयंकर युद्ध हुआ। ब्रहस्पति को पत्नी तो वापिस मिली पर थी गर्भवती जिससे बुध ग्रह पैदा हुआ। जी हां इसी चंद्रमा की बात हो रही है जिस पर हमारे भारत का विक्रम लैंडर यान उतरा है। यह कहानी महाभारत खिल भाग, श्रीमद्भागवत पुराण, और शिव पुराण में दर्ज है। कई और किताबों में हो सकती है लेकिन मैने यह इन तीन किताबों में पढ़ी है। पन्ने तीनों के पोस्ट कर दूंगा पर कहानी सिर्फ एक किताब भागवत पुराण के आधार पर लिख रहा हूं। कहानी यूं है:– ब्रह्मा का पुत्र अत्री, अत्री के आंखो से अमृतमय चंद्रमा का जन्म हुआ। ब्रह्मा ने चंद्रमा को ब्राह्मण, औषधि और नक्षत्रों का अधिपति बना दिया। चंद्रमा का घमंड बड़ गया, जिससे उसने देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी का बलपूर्वक अपहरण कर लिया। चंद्रमा का पक्ष लिया असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने। शिव ने ब्रहस्पति का। देवताओं और असुरों का युद्ध शुरू हुआ, विनाश हुआ। ब्रह्मा जी से गुहार लगाई ब्रहस्पति के गुरु अत्री ने । ब्रह्मा ने डांटा चंद्रमा को और तारा को लोटा दिया लेकिन वह तो गर्भवती थी। ब्रहस्पति ने गर्भ गिराने को कहा, गिरा...

अप्सरा स्वर्ग में

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महाभारत  महाभारत में है कि युद्ध में मारे गए शुर वीर लोगो पर शोक नहीं करना चाहिए,वो स्वर्ग में प्रतिष्ठित होते है, हजारों सुंदर अप्सरा उन्हें अपना पति मानती है  (महाभारत शांति पर्व 98/44,45,46) सेक्स का अड्डा बना दिया ह सुंदर अप्सराये मिलेगी रंभा उर्वसी मेनका बड़ी बड़ी चूतरो वाली

शिव लिंग

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पुराणो मे लिखी है. #शिवपुराण शिवपुराण मे शिवलिंग स्थापना कि एक कथा है कथा के अनुसार दारु नाम के वन मे शिवभक्त ब्राह्मण रहते थे वे एक बार लकडियां चुनने के लिए वन को गये. उतने मे वहा शिवजी आ गये जोकी नंगे थे और हाथ मे अपना लिंग पकडे हुये थे. उनको देखकर ऋषींओ कि पत्नीया भयभित,व्याकुल,हैरान हो गयी. कई अलिंगन करने लगी. उतने मे वहा ऋषी महात्मा आ गये क्रोध मे उन्होंने श्राप दिया कि तुम्हारा लिंग पृथ्वी पर गिर पडे. और वैसा हि हुआ. वो लिंग जहा भी जाता सब कुछ जलकर भस्म हो जाता. तब उन ऋषी महात्माओ ने ब्रह्माके कहने पर पार्वती कि आराधना कि. पार्वतीने योनीरुप धारण करके उस लिंग को अपने अंदर स्थापित कर लिया. (शिवपुराण, कोटीरुद्रसंहिता 4, अध्याय 12) क्या कहते हो पंडो क्या अब भी शिवलिंग को प्रतिक या चिन्ह हि कहोगे ? कथा से स्पष्ट है कि पार्वतीने अपनी योनी मे शंकर के लिंग को स्थापित करके रखा है. #भविष्य_पुराण भविष्य पुराण मे भी शिवलिंग पर एक कथा है. कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा विष्णु और महेश अत्रि ऋषी कि पत्नी अनुसया के पास गये. और उनकी सुंदरता पर मंत्रमुग्ध हो कर उनसे कहने लगे हे मदभरे नेत्रो वाली सुं...

रामायण अश्लीलता

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जब सीता हरण के बाद सीता पहली बार राम लक्ष्मण को देखती है तब अपने बारे में बताती है  मेरी जांघे गोल है, दोनों स्तन परस्पर सटे हुए स्थूल है, नाभि गहरी है, पार्श्वभाग(गां#) और छाती मांसल है  (,युद्ध कांड 48/9,10,11) रावण को देख कर सीता अपनी जांघों को सिकुड़ लेती है और उठे हुए दोनों स्तनों को हाथ से ढक लेती है  (सुंदर काण्ड 58/66) रावण को देख कर सीता अपनी जांघों को सिकुड़ लेती है और उठे हुए दोनों स्तनों को हाथ से ढक लेती है  (सुंदर काण्ड 58/66) "हनुमान लंका में आने पर सीता के सौन्दर्य का वर्णन करता है सीता का मुख मनोहर था, दोनों स्तन गोलाकार थे, कटिभाग बहुत ही सुंदर था (श्लोक 28,29)  (कटिभाग याने नितंब/ गां#) देखे वाल्मीकि रामायण सुंदर काण्ड 15 ●●●● हनुमान जब सीता को खोजते खोजते लंका पोहचता है तब सीता उसे चित्रकूट पर्वत का प्रसंग बताती है  कथा के अनुसार इन्द्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप लेकर  सीता के स्तन पर चोच मारी थी  उस काक(कौवे) ने अचानक आकर मेरे स्तनों पर चोंच मारी  और उछल उछल कर मुझे घायल कर दिया ...